Sunday, 10 May 2020

माता दुर्गा जी की आरती | Mata Durga Aarti

माता दुर्गा जी की आरती | Mata Durga Aarti


जय अम्‍बे गौरीमैया जय श्‍यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्‍यावत हरि ब्रह्मा शिवरी।। जय० ।।

मांग सिंदूर विराजतटीको मृगमद को।
उज्‍ज्‍वल से दोउ नैनाचन्‍द्रबदन नीको ।। जय० ।।


कनक समान कलेवररक्‍ताम्‍बर राजै।
रक्‍त पुष्‍प गलमालाकण्‍ठन पर साजै।। जय० ।।


केहरि वाहन राजतखड़ग खप्‍परधारी।
सुर नर मुनिजन सेवततिनके दुखहारी।। जय० ।।


कानन कुण्‍डल शोभितनासाग्रे मोती।
कोटिक चन्‍द्र दिवाकरराजत सम ज्‍योति।। जय० ।।


शुम्‍भ निशुम्‍भ विाडारेमहिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैनानिशदिन मदमाती।। जय० ।।


चण्‍ड मुण्‍ड संघारेशोणित बीज हरे।
मधुकैटभ दोउ मारेसुर भयहीन करे।। जय० ।।


ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानीतुम शिव पटरानी।। जय० ।।


चौसठ योगिनी गावतऩत्‍य करत भैरो।
बाजत ताल मृदंगाअरु बाजत डमरू ।। जय० ।।


तुम हो जग की मातातुम ही हो भर्ता।
भक्‍तन की दुख हरतासुख-सम्‍पत्ति करता।। जय० ।।


भुजा चार अति शोभितखड़ग खप्‍पर धारी।
मनवांछित फल पावतसेवत नर रानी।। जय० ।।


कंचन थाल विराजतअगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजतकोटि रतन ज्‍योति।। जय० ।।


श्री अम्‍बे जी की आरतीजो कोई नद गावै।
कहत शिवानन्‍द स्‍वामीसुख सम्‍पति पावै।। जय० ।।


प्रेम से बोलो सारे बोलो जय अम्बे मैया 




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