Showing posts with label आरती. Show all posts
Showing posts with label आरती. Show all posts

Sunday, 10 May 2020

आरती सरस्वती माता की Aarti Sarswati Mata Ki 2020





आरती सरस्वती माता की Aarti Sarswati Mata Ki 

आरती करूं सरस्वती मातु, हमारी हो भव भय हारी हो।
हंस वाहन पदमासन तेरा, शुभ्र वस्त्र अनुपम है तेरा।।

रावण का मन कैसे फेरा, वर मांगत बन गया सवेरा।
यह सब कृपा तिहारी, उपकारी हो मातु हमारी हो।।

तमोज्ञान नाशक तुम रवि हो, हम अम्बुजन विकास करती हो।
मंगल भवन मातु सरस्वती हो, बहुमूकन वाचाल करती हो।

विद्या देने वाली वीणा, धारी हो मातु हमारी।
तुम्हारी कृपा गणनायक, लायक विष्णु भये जग के पालक।

अम्बा कहायी सृष्टि ही कारण, भये शम्भु संसार ही घालक।
बन्दों आदि भवानी जग, सुखकारी हो मातु हमारी।

सदबुद्धि विद्याबल मोही दीजै, तुम अज्ञान हटा रख लीजै।
जन्मभूमि हित अर्पण कीजै, कर्मवीर भस्महिं कर दीजै।।

ऐसी विनय हमारी भवभय हरी, मातु हमरी हो, आरती करूँ सरस्वती मातु।।






श्री बृहस्‍पति देव जी की आरती || Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti




Shre Brihaspati Dev Ji Ki aart| श्री बृस्पति देव जी की आरती  
जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा॥
ॐ जय बृहस्पति देवा ।।१।।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।२।।

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।३।।

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।४।।

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।५।।

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारी।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।६।।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
जेष्‍ठानंद आनंदकर, सो निश्चय पावे॥
ॐ जय बृहस्पति देवा।।७।।

सब बोलो विष्णु भगवान की जय!
बोलो बृहस्पतिदेव की जय!


माता दुर्गा जी की आरती | Mata Durga Aarti

माता दुर्गा जी की आरती | Mata Durga Aarti


जय अम्‍बे गौरी, मैया जय श्‍यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्‍यावत , हरि ब्रह्मा शिवरी।। जय० ।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्‍ज्‍वल से दोउ नैना, चन्‍द्रबदन नीको ।। जय० ।।


कनक समान कलेवर, रक्‍ताम्‍बर राजै।
रक्‍त पुष्‍प गलमाला, कण्‍ठन पर साजै।। जय० ।।


केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्‍परधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।। जय० ।।


कानन कुण्‍डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्‍द्र दिवाकर, राजत सम ज्‍योति।। जय० ।।


शुम्‍भ निशुम्‍भ विाडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।। जय० ।।


चण्‍ड मुण्‍ड संघारे, शोणित बीज हरे।
मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।। जय० ।।


ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।। जय० ।।


चौसठ योगिनी गावत, ऩत्‍य करत भैरो।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ।। जय० ।।


तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता।
भक्‍तन की दुख हरता, सुख-सम्‍पत्ति करता।। जय० ।।


भुजा चार अति शोभित, खड़ग खप्‍पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर रानी।। जय० ।।


कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्‍योति।। जय० ।।


श्री अम्‍बे जी की आरती, जो कोई नद गावै।
कहत शिवानन्‍द स्‍वामी, सुख सम्‍पति पावै।। जय० ।।


प्रेम से बोलो सारे बोलो जय अम्बे मैया 




Saturday, 9 May 2020

हनुमान जी की आरती।Hanuman Aarti


हनुमान जी की आरती।Hanuman Aarti


आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अनजानी पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमान जी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।



Friday, 8 May 2020

गणेश जी की आरती , गणेश मंत्र -Ganesh Aarti, Ganesh Mantra

                                                   ऊँ गं गणपतये नमः




गणेश मंत्र 

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा



ऊँ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिद्धिविनायक नमो नमः
अष्टविनायक नमो नमः
गणपति बाप्पा मोरया
मंगल मूर्ति मोरया

गणेश  जी की आरती Ganesh Aarti


जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,

सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥